कोई इकलौता भाई था तो कोई करियर बनाने पहुंचा था दिल्ली
नई दिल्ली, संवाददाता: सत्य निकेतन में पांच मंजिला इमारत का ढहना सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि कई परिवारों के सपनों के टूटने की दर्दनाक कहानी है। इस हादसे में मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश के रहने वाले छात्रों की जान चली गई। कोई रक्षाबंधन पर अपनी बहनों से राखी बंधवाकर दिल्ली लौटा था तो कोई कुछ दिन पहले ही छुट्टियां खत्म होने के बाद पढ़ाई के लिए वापस आया था। किसी ने दिल्ली विश्वविद्यालय में दाखिला लेकर बेहतर भविष्य का सपना देखा था तो कोई परिवार का इकलौता बेटा था, लेकिन बीते रविवार को कुछ ही घंटों में इन परिवारों के सपने मलबे के नीचे दब गए।
मध्य प्रदेश के देवास के कैलादेवी क्षेत्र स्थित जय बजरंग नगर का रहने वाला अर्पित जाज (18) भी इसी हादसे का शिकार हो गया। अर्पित पढ़ाई के सिलसिले में दिल्ली में रहता था। वह दिल्ली के आत्माराम सनातन धर्म कॉलेज में बीकॉम सेकंड ईयर का छात्र था। रक्षाबंधन की छुट्टियां मनाने अर्पित देवास अपने घर आया था। परिवार के साथ त्योहार मनाने के बाद वह रविवार सुबह करीब सात बजे दिल्ली पहुंचा था। घर से निकलते समय परिवार को क्या पता था कि कुछ ही घंटों बाद उनके बेटे के लिए दिल्ली में मौत इंतजार कर रही है। बीते रविवार दोपहर सत्य निकेतन इलाके में भरभराकर गिरी पांच मंजिला इमारत में ही अर्पित रह रहा था। हादसे की खबर मिलते ही उसके माता-पिता ने बेटे को फोन किया, लेकिन मोबाइल बंद मिला। बार-बार फोन करने के बावजूद जब अर्पित से बात नहीं हुई तो परिवार की चिंता बढ़ती चली गई। आखिरकार परिजन दिल्ली के लिए रवाना हो गए। मलबे में दबे लोगों को निकालने के लिए चल रहे रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान अर्पित के भी अंदर फंसे होने की जानकारी मिली।काफी कोशिशों के बाद जब उसकी मौत की पुष्टि हुई तो देवास में उसके घर और आसपास के इलाके में मातम छा गया।
इस हादसे ने मध्य प्रदेश के कटनी जिले के एक और परिवार को गहरा जख्म दिया है। वहां की दुबे कॉलोनी निवासी अक्षत यादव (19) भी हादसे में जान गंवाने वाले छात्रों में शामिल था। अक्षत दिल्ली में रहकर दिल्ली विश्वविद्यालय से बीकॉम की पढ़ाई कर रहा था। परिवार और पड़ोसियों के मुताबिक, वह पढ़ाई में आगे बढ़कर अपने भविष्य को बेहतर बनाना चाहता था। इसी उम्मीद के साथ वह घर से दूर दिल्ली में रह रहा था। बीते रविवार को जब सत्य निकेतन की करीब 40 साल पुरानी इमारत ढही तो अक्षत भी उसकी चपेट में आ गया। मलबे में दबने के बाद उसे गंभीर हालत में अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टर उसे बचा नहीं सके। बाद में शव की पहचान अक्षत यादव के रूप में हुई। दूसरी ओर, छत्तीसगढ़ के दुर्ग का रहने वाला युवराज सोनी (20) भी सत्य निकेतन हादसे में मारा गयाष युवराज दिल्ली विश्वविद्यालय के मोतीलाल नेहरू कॉलेज में बीकॉम सेकंड ईयर का छात्र था और दिल्ली में बॉयज पीजी में रहता था। कॉलेज की छुट्टियों के दौरान युवराज दुर्ग स्थित अपने घर आया था। छुट्टियां खत्म होने के बाद वह करीब तीन दिन पहले ही दिल्ली लौटा था। परिवार को क्या पता था कि बेटे का दिल्ली लौटना उसके जीवन का आखिरी सफर साबित होगा।
मां को अभी नहीं बताया गया बेटे पवन की मौत का सच
यूपी के औरैया जिले के दिबियापुर कस्बे का एक परिवार इस हादसे के बाद सदमे में है। वहां के रिटायर्ड होम्योपैथी फार्मासिस्ट विशंभर सिंह का इकलौता बेटा पवन कुमार (17) भी इस हादसे में जान गंवा बैठा। इसी साल 20 जुलाई को उसका दिल्ली विश्वविद्यालय में बीएससी कंप्यूटर साइंस में दाखिला हुआ था। पवन चार बहनों के बीच इकलौता भाई था। बहनों के लिए वह सिर्फ भाई नहीं, बल्कि परिवार की उम्मीद और सहारा था। रक्षाबंधन के मौके पर वह घर आया था। बहनों से राखी बंधवाई। परिवार के साथ समय बिताया और जन्माष्टमी का पर्व भी मनाया। फिर बीते शनिवार को वह दिल्ली के लिए रवाना हुआ। परिवार को लगा कि बेटा पढ़ाई के लिए वापस जा रहा है और जल्द ही छुट्टियों में फिर घर आएगा, लेकिन रविवार को दिल्ली पहुंचने के कुछ ही समय बाद जिस हॉस्टल में पवन रह रहा था, उसकी पांच मंजिला इमारत भरभराकर गिर गई। पवन की मां मीरा देवी मानसिक रूप से बीमार हैं। परिवार को डर है कि बेटे की मौत की खबर सुनकर उनकी हालत बिगड़ सकती है। इसलिए उन्हें अभी तक पवन की मौत की जानकारी नहीं दी गई है। एक मां अपने बेटे के लौटने का इंतजार कर रही है और परिवार उसके सामने बेटे की मौत का सच बताने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा।

