सितंबर तक यूपी में गोरखपुर-सोनौली हाईवे तैयार शुरू यह सफर
इस अहम परियोजना का 89 फीसदी तक काम अभी तक हुआ पूरा
नई दिल्ली: दिल्ली-एनसीआर से नेपाल का सड़क मार्ग से सफर महज चंद घंटों में पूरा होने का सपना जल्द ही साकार होने जा रहा है। भारत-नेपाल को जोड़ने वाला यूपी का गोरखपुर-सोनौली फोर-लेन हाईवे अपने अंतिम चरण में है। करीब 89% निर्माण पूरा होने के बाद इस परियोजना से दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश और बिहार से नेपाल की सड़क यात्रा तेज, सुरक्षित और अधिक सुगम होना तय है। वर्षों से ट्रैफिक जाम, संकरी सड़कों और लंबी यात्रा से परेशान यात्रियों को इस परियोजना से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
दिल्ली से नेपाल जाने वाले यात्री यमुना एक्सप्रेसवे, आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे, पूर्वांचल एक्सप्रेसवे और गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे के जरिए सीधे गोरखपुर पहुंच सकेंगे। फिर वहां से नया गोरखपुर-सोनौली फोर-लेन हाईवे उन्हें नेपाल सीमा तक तेज और सुगम कनेक्टिविटी देगा। इस पूरे रूट की कुल दूरी लगभग 815 से 830 किलोमीटर है। परियोजना से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक, बेहतर सड़क नेटवर्क के कारण यात्रा का समय आठ से नौ घंटे लगेगा। इस हाईवे का सबसे बड़ा फायदा दिल्ली-एनसीआर के नेपाल जाने वाले यात्रियों को मिलेगा। साथ ही एनसीआर से सटे पश्चिमी यूपी और बिहार के यात्रियों को भी मिलेगा। पहले नेपाल बॉर्डर तक पहुंचने में ट्रैफिक और खराब सड़क के कारण काफी समय लगता था, लेकिन अब यात्रा पहले की तुलना में कहीं अधिक तेज और आरामदायक होगी।
मिली जानकारी के मुताबिक,
अधिकारियों के मुताबिक, गोरखपुर के ‘जंगल कौड़िया’ से सोनौली बॉर्डर तक का यह नया हाईवे लगभग पूरी तरह तैयार है। कुछ आखिरी चरण का काम पूरे रफ्तार से जारी है। यह परियोजना लगभग 79.5 किलोमीटर लंबी है। इसे करीब ₹1458 करोड़ की लागत से विकसित किया जा रहा है। पूरे हाईवे को भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया गया है, ताकि भविष्य में आवश्यकता पड़ने पर इसे छह लेन तक विस्तारित किया जा सके। उसके बाद दिल्ली से नेपाल जाने वाले भारतीय सैलानी अपनी कार या टैक्सी से सबसे पहले यमुना एक्सप्रेस-वे और फिर आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पकड़ेंगे। फिर लखनऊ के पास से पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे और फिर गोरखपुर लिंक एक्सप्रेस-वे के जरिए सीधे गोरखपुर पहुंचेंगे। वहां से नए तैयार हाईवे से नेपाल में दाखिल होंगे। बता दें कि दिल्ली से नेपाल करीब 815 से 830 किलोमीटर है।
हाईवे पर मिलेंगी आधुनिक सुविधाएं
यात्रा को सुरक्षित और सुविधाजनक बनाने के लिए इस परियोजना में आधुनिक बुनियादी ढांचे का विशेष ध्यान रखा गया है। हाईवे पर एक रेलवे ओवरब्रिज, दो फ्लाईओवर, 24 अंडरपास, 105 कलवर्ट (पुलिया) और लगभग 68 किलोमीटर लंबी सर्विस रोड का निर्माण किया जा रहा है। अधिकारियों ने बताया कि इसके अलावा पूरे मार्ग पर एडवांस्ड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम लगाया जा रहा है। इसके तहत सीसीटीवी कैमरे, इमरजेंसी कॉल बॉक्स, इलेक्ट्रॉनिक डिस्प्ले साइनबोर्ड और रियल-टाइम ट्रैफिक मॉनिटरिंग जैसी हाईटेक सुविधाएं उपलब्ध होंगी। इससे दुर्घटनाओं की स्थिति में तुरंत सहायता मिल सकेगी और ट्रैफिक प्रबंधन भी अधिक प्रभावी होगा।
व्यापार और पर्यटन को मिलेगा बड़ा लाभ
दिल्ली से नेपाल के लिए गोरखपुर-सोनौली हाईवे का लाभ केवल यात्रियों तक सीमित नहीं रहेगा। सोनौली बॉर्डर भारत और नेपाल के बीच सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्गों में से एक है। फोर-लेन हाईवे बनने से मालवाहक वाहनों की आवाजाही तेज होगी। इससे दोनों देशों के बीच व्यापार और लॉजिस्टिक्स को नई गति मिलेगी। इसके अलावा यह हाईवे बौद्ध सर्किट के प्रमुख धार्मिक स्थलों को भी बेहतर कनेक्टिविटी देगा। गोरखपुर, कुशीनगर और नेपाल स्थित भगवान बुद्ध की जन्मस्थली लुम्बिनी तक पहुंचना पहले की तुलना में अधिक आसान होगा। इससे धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ क्षेत्रीय पर्यटन उद्योग को भी बड़ा प्रोत्साहन मिलने की संभावना है।

