डोभाल-वांग वार्ता में रिश्तों को स्थिर रखने पर जोर
2027 में भारत में होगी अगली बैठक प्रस्तावित
बीजिंग, एजेंसी: भारत और चीन ने लंबे समय से चले आ रहे सीमा विवाद के राजनीतिक समाधान की दिशा में प्रयास जारी रखने पर सहमति जतायी है। दोनों देशों ने सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखने को द्विपक्षीय संबंधों के निरंतर विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया। यह सहमति राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी के बीच 24-25 अगस्त को बीजिंग में हुई विशेष प्रतिनिधियों की 25वें दौर की वार्ता में बनी। दोनों नेताओं ने बैठक की सह-अध्यक्षता की।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग के रणनीतिक मार्गदर्शन में दोनों विशेष प्रतिनिधियों ने सीमा मुद्दे पर स्पष्ट और गहन चर्चा की। बातचीत रचनात्मक और भविष्य की दिशा पर केंद्रित रही। दोनों पक्षों ने व्यापक और दीर्घकालिक हितों को ध्यान में रखते हुए विवाद के राजनीतिक समाधान की दिशा में काम जारी रखने पर सहमति जतायी। साथ ही सीमा निर्धारण वार्ता आगे बढ़ाने, सीमा प्रबंधन मजबूत करने और संबंधित तंत्रों में सुधार पर विचार किया गया। सीमा पार सहयोग को बढ़ावा देने तथा द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी चर्चा हुई।
2005 के सिद्धांतों के आधार पर समाधान की तलाश
चीनी विदेश मंत्रालय के मुताबिक, दोनों देशों ने 2005 में तय राजनीतिक मार्गदर्शक सिद्धांतों का पालन करने की प्रतिबद्धता दोहरायी। इसके तहत आपसी सम्मान और समझ की भावना के साथ विशेष प्रतिनिधियों की वार्ता व्यवस्था के जरिए सीमा विवाद का निष्पक्ष, उचित और दोनों पक्षों को स्वीकार्य व्यापक समाधान तलाशने पर सहमति बनी। दोनों देशों ने विशेष प्रतिनिधियों की 26वें दौर की वार्ता 2027 में भारत में आयोजित करने पर भी सहमति जतायी। वांग यी ने कहा कि चीन और भारत को संबंधों को रणनीतिक एवं दीर्घकालिक दृष्टिकोण से देखना चाहिए, संवाद मजबूत करना और मतभेदों को उचित तरीके से संभालना चाहिए।
स्थिर रिश्तों को बताया साझा हित
चीनी पक्ष के अनुसार, डोभाल ने कहा कि भारत और चीन प्रतिद्वंद्वी नहीं, बल्कि साझेदार हैं। स्थिर, पूर्वानुमेय और भविष्य की ओर देखने वाले संबंध दोनों देशों के साझा हित में हैं और एशिया तथा व्यापक विश्व के लिए भी महत्वपूर्ण हैं। भारत ने कहा कि अक्टूबर 2024 में कज़ान और अगस्त 2025 में तियानजिन में मोदी-शी मुलाकातों में बनी सहमतियों को लागू करने में भी प्रगति हुई है। कैलाश मानसरोवर यात्रा और तीन निर्धारित व्यापारिक दर्रों के जरिए सीमा व्यापार सहित लोगों के बीच संपर्क धीरे-धीरे बहाल हुआ है।
गलवान के बाद सामान्य रिश्तों की कोशिश
यह वार्ता 2020 के गलवान संघर्ष के बाद दोनों देशों के संबंधों को स्थिर करने के जारी कूटनीतिक प्रयासों के बीच हुई। डोभाल ने बीजिंग में चीन के उपराष्ट्रपति हान झेंग से भी मुलाकात की। करीब 3,488 किलोमीटर लंबी भारत-चीन सीमा को लेकर विवाद है और समाधान के लिए विशेष प्रतिनिधियों की व्यवस्था 2003 में स्थापित की गयी थी। 25वें दौर की वार्ता के बाद अब अगला चरण 2027 में भारत में होगा। सितंबर में नयी दिल्ली में प्रस्तावित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान शी जिनपिंग की संभावित भारत यात्रा के मद्देनजर भी इस वार्ता को अहम माना जा रहा है।

