वॉशिंगटन। अमरीका और ईरान के बीच जारी सैन्य टकराव अब रणनीतिक होर्मुज जलडमरूमध्य के नियंत्रण के मुद्दे पर केंद्रित होता नजर आ रहा है। दोनों देशों ने इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर जहाजों की आवाजाही की स्थिति को लेकर परस्पर विरोधी दावे किए हैं। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कोर (आईआरजीसी) ने सप्ताहांत में दावा किया कि उसने बिना अनुमति निर्धारित मार्ग का उपयोग करने का प्रयास कर रहे एक जहाज पर चेतावनी स्वरूप गोलीबारी करने के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य बंद कर दिया है। बाद में ईरान के समुद्री प्राधिकारियों ने भी इस दावे का समर्थन करते हुए कहा कि जब तक क्षेत्र में “स्थिरता और शांति” बहाल नहीं हो जाती, तब तक इस जलमार्ग से जहाजों की आवाजाही संभव नहीं है।
इसके विपरीत अमरीका ने दावा किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह खुला है। अमरीकी केंद्रीय कमान (सेंटकॉम) ने कहा कि यह जलमार्ग सभी जहाजों के लिए खुला है और अमरीकी बल समुद्री नौवहन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए तैयार हैं। अमरीकी नौसेना की देखरेख में संचालित संयुक्त समुद्री सूचना केंद्र ने भी कहा कि ओमान के तट के समानांतर स्थित दक्षिणी समुद्री मार्ग दोनों दिशाओं में जहाजों की आवाजाही के लिए खुला है। अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सीएनएन से कहा, “हमारे हिसाब से यह जलमार्ग खुला है।”
इस बीच, अमरीकी सेना ने रविवार देर रात ईरान के विभिन्न हिस्सों पर एक और बड़े पैमाने पर हमले किए। अमेरिकी केंद्रीय कमान (सेंटकॉम) के अनुसार इन हमलों में दर्जनों ठिकानों को निशाना बनाया गया। सेंटकॉम ने कहा कि हमलों में ईरान की वायु रक्षा प्रणालियां, तटीय रडार, मिसाइल एवं ड्रोन क्षमताएं तथा छोटी नौकाएं निशाना बनीं। उसका दावा है कि इन हमलों का उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले अंतरराष्ट्रीय समुद्री यातायात पर हमले करने की ईरान की क्षमता को कमजोर करना था।
ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, अमेरिकी हमले दक्षिणी और पश्चिमी ईरान के कई क्षेत्रों में हुए, जिनमें क़ेश्म द्वीप, बंदर अब्बास, इराक सीमा से लगे खुज़ेस्तान प्रांत तथा फारूर द्वीप शामिल हैं। रिपोर्टों के मुताबिक फारूर द्वीप पर हुए हमले में एक दूरसंचार कर्मचारी की मौत हो गई, जबकि दो अन्य घायल हो गए। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कोर (आईआरजीसी) ने इसके जवाब में सोमवार तड़के जॉर्डन, बहरीन और कुवैत स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए।
आईआरजीसी ने एक बयान में कहा कि अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर कथित हमलों को आधार बनाकर दक्षिणी ईरान में कई स्थानों पर हवाई हमले किये, जिसके जवाब में यह कार्रवाई की गई। फिर से शुरू हुई लड़ाई ने पहले से ही नाज़ुक बातचीत पर और दबाव डाल दिया है और इस बात का डर बढ़ा दिया है कि यह संकट सीधे सैन्य टकराव से आगे बढ़ सकता है। इस इलाके में अमरीका के सहयोगी कई देशों में एयर डिफेंस सिस्टम एक्टिवेट कर दिए गए। बहरीन में एयर रेड सायरन बजाए गए, जबकि कुवैत की सेना ने कहा कि वह “दुश्मन के हवाई टारगेट” का जवाब दे रही थी। जॉर्डन की सेना ने कहा कि उसने अपने हवाई क्षेत्र में घुसी चार मिसाइलों को रोक दिया।
तेहरान की रणनीति दुनिया के सबसे अहम ऊर्जा परिवहन मार्ग में से एक को खतरे में डालकर आर्थिक दबाव बनाने पर केंद्रित दिखती है। ईरान के सर्वोच्च नेता के सलाहकार मोहसेन रेज़ाई ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य को ईरान की सबसे अहम रणनीतिक संपत्तियों में से एक बताया और कहा कि यह “दर्जनों परमाणु बमों से भी ज़्यादा महत्वपूर्ण” है। पश्चिमी देश लंबे समय से ईरान पर परमाणु हथियार बनाने की क्षमता हासिल करने की कोशिश का आरोप लगाते रहे हैं, जबकि ईरान का कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है।

