शरीर में जरूरत से ज्यादा तांबा मात्रा एकत्र से हो जाते हैं लिवर सिरोसिस व न्यूरो संबंधी रोग
नई दिल्ली: इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बिलियरी साइंसेज (आईएलबीएस) ने विल्सन रोग से पीड़ित मरीजों और उनके परिवारों को सशक्त बनाने के उद्देश्य से विल्सन डिजीज पेशेंट एडवोकेसी प्रोग्राम का शुभारंभ किया।
विल्सन रोग एक दुर्लभ आनुवंशिक बीमारी है, जिसमें शरीर में तांबा अत्यधिक मात्रा में जमा हो जाता है, जिससे लिवर सिरोसिस और तंत्रिका संबंधी गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। यह रोग लगभग हर 30,000 में से एक बच्चे या युवा को प्रभावित करता है। आईएलबीएस हर वर्ष 25–30 नए विल्सन रोग मामलों का उपचार करता है। बाल हेपेटोलॉजी विभागकी ओर से आयोजित सम्मेलन में दुनिया भर से करीब 85 विशेषज्ञ और 110 प्रतिनिधियों ने भाग लिया, जहां उन्नत जांच तकनीकों और नई उपचार रणनीतियों पर मंथन हुआ।
कार्यक्रम का उद्घाटन नीति आयोग के सदस्य प्रो. विनोद के. पॉल ने किया। उन्होंने दुर्लभ रोगों में समय पर निदान, प्रभावी जागरूकता और सुलभ आजीवन इलाज की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने बताया कि अत्यंत महंगी दवा ट्राइएन्टीन अब भारत में सरकार और फार्मा उद्योग के सहयोग से विदेशों की तुलना में सौवें हिस्से की कीमत पर उपलब्ध है। आईएलबीएस के निदेशक प्रो. शिव कुमार सरीन ने इसे विल्सन रोगियों के लिए ‘वरदान’ बताया।

