देहरादून। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भारतीय मृदा एवं जल संरक्षण संस्थान देहरादून का दौरा किया।
इस मौके पर चौहान ने कहा कि मृदा स्वास्थ्य संरक्षण एवं जल संसाधनों का सतत प्रबंधन देश के कृषि विकास की आधारशिला है तथा यह विकसित भारत 2047 के लक्ष्य से सीधे जुड़ा हुआ है। उन्होंने मृदा एवं जल संरक्षण तकनीकों के ग्राम स्तर पर विस्तार हेतु स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित करने और एक ठोस कार्ययोजना तैयार करने पर बल दिया। साथ ही, किसानों एवं आम नागरिकों की सक्रिय भागीदारी से इन प्रयासों को जन आंदोलन के रूप में विकसित करने का आह्वान किया।
संस्थान से जुड़े किसानों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि वैज्ञानिक तकनीकों के माध्यम से मृदा अपरदन में कमी आई है, अवनत भूमि का पुनर्वास हुआ है तथा जल संचयन संरचनाओं, यांत्रिक उपायों एवं बायो-इंजीनियरिंग तकनीकों से जल उपलब्धता में सुधार हुआ है। हाई-टेक बांस नर्सरियों द्वारा क्षेत्रीय आवश्यकताओं के अनुसार बांस प्रजातियों की उपलब्धता भी प्रदर्शित की गई, जिसके अंतर्गत नदी तट कटाव नियंत्रण हेतु डेंड्रोकैलेमस स्टॉक्सी प्रजाति का वितरण हरिद्वार में किया गया।
संस्थान द्वारा आजीविका उन्मुख पहलों के अंतर्गत स्वयं सहायता समूहों को मूल्य संवर्धन एवं आय विविधीकरण के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिसमें जैविक लहसुन एवं आंवला अचार निर्माण जैसी गतिविधियाँ शामिल हैं। उच्च मूल्य वाली फसल काली हल्दी की शुरुआत तथा बांस शिल्प प्रशिक्षण कार्यक्रमों को भी ग्रामीण युवाओं एवं लघु किसानों की आय वृद्धि और स्वरोजगार को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल के रूप में प्रस्तुत किया गया। इस अवसर पर दायित्वधारी विनय रूहेला, डॉ. चरण सिंह, डॉ. जे.एम.एस. तोमर, डॉ. डी.वी. सिंह, गिरीश भट्ट, डॉ बाँके बिहारी, डॉ सदिकुल इस्लाम, अमित चौहान आदि उपस्थित रहे।
केंद्रीय कृषि मंत्री ने भारतीय मृदा एवं जल संरक्षण संस्थान देहरादून का दौरा किया
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