वाणिज्यिक मात्रा केलंबित मामलों की समीक्षा, ड्रग नेटवर्क तोड़ने के निर्देश
नशा तस्करी पर कड़ा रुख, गैंगस्टर एक्ट सहित संपत्ति जब्ती तक की कार्रवाई के निर्देश
देहरादून । डॉ० वी० मुरूगेशन, अपर पुलिस महानिदेशक, अपराध एवं कानून व्यवस्था, उत्तराखण्ड द्वारा समस्त जनपदीय पुलिस प्रभारियों, एसटीएफ एवं परिक्षेत्रीय पुलिस महानिरीक्षकों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से एनडीपीएस एक्ट के अन्तर्गत वाणिज्यिक मात्रा में बरामदगी से संबंधित लंबित विवेचनाओं की विस्तृत समीक्षा की गई।
अपर पुलिस महानिदेशक, अपराध एवं कानून व्यवस्था, उत्तराखण्ड द्वारा एक वर्ष से अधिक समय से लंबित वाणिज्यिक मात्रा संबंधी अभियोगों का निर्धारित समयसीमा के अन्दर निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। गढ़वाल परिक्षेत्र के जनपदों के कुल 33 तथा कुमायूँ परिक्षेत्र के 44 वाणिज्यिक मात्रा से संबंधित लंबित मामलों की अभियोगवार गहन समीक्षा करते हुए साक्ष्यों के आधार पर गैंगस्टर एक्ट, पिट एनडीपीएस एक्ट तथा एनडीपीएस एक्ट के अंतर्गत प्रभावी कार्यवाही करते हुए धारा 68 के अन्तर्गत संपत्ति अधिग्रहण की कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।
उन्होंने कहा कि नशा तस्करी में गिरफ्तारी के उपरांत मुख्य ड्रग तस्करों के नेटवर्क को ध्वस्त कर कठोर विधिक कार्यवाही सुनिश्चित की जाए। परिक्षेत्रीय पुलिस महानिरीक्षकों को ऐसे अभियोगों का समय-समय पर निकट पर्यवेक्षण कर वैधानिक कार्यवाही सुनिश्चित करने हेतु निर्देशित किया गया। भारत सरकार के संबंधित पोर्टल का प्रभावी उपयोग करने के निर्देश दिए गए। साथ ही अभ्यस्त अपराधियों की हिस्ट्रीशीट खोलकर उनकी निरंतर निगरानी सुनिश्चित करने हेतु निर्देशित किया गया।
गोष्ठी के दौरान पुलिस महानिरीक्षक, एसटीएफ उत्तराखण्ड को जनपदों में पंजीकृत वाणिज्यिक मामलों की विवेचनात्मक कार्यवाही की नियमित समीक्षा कर अद्यतन प्रगति से अवगत कराने हेतु निर्देशित किया गया। एसटीएफ में स्थापित प्रदेश स्तरीय एएनटीएफ को एनडीपीएस एक्ट से संबंधित समस्त सूचनाओं का व्यवस्थित अभिलेखीकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
अपर पुलिस महानिदेशक द्वारा स्पष्ट किया गया कि नशा तस्करी के मामलों में किसी भी प्रकार की शिथिलता, लापरवाही अथवा मिलीभगत पाए जाने पर कठोर कार्यवाही की जाएगी। जिन मामलों में मादक पदार्थ की परीक्षण रिपोर्ट प्राप्त होने के उपरांत भी विवेचना लंबित है, उनकी जांच कर आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश दिए गए। अवशेष विवेचनात्मक कार्यवाही पूर्ण करने हेतु विवेचकों को एक माह की समयावधि प्रदान की गई।
उन्होंने जनपद हरिद्वार के 02 प्रकरणों तथा जनपद देहरादून एवं नैनीताल के 01-01 प्रकरण में अन्वेषण में लापरवाही पाए जाने पर संबंधित विवेचकों के विरुद्ध प्रारंभिक जांच कर नियमानुसार विभागीय कार्यवाही करने के निर्देश दिए गए। साथ ही क्षेत्राधिकारियों को भी पर्यवेक्षण का स्तर सुधारने के लिए निर्देशित किया गया।
समीक्षा गोष्ठी में डॉ0 नीलेश आनन्द भरणें, पुलिस महानिरीक्षक, STF उत्तराखण्ड, सुनील कुमार मीणा पुलिस महानिरीक्षक, अपराध एवं कानून व्यवस्था, उत्तराखण्ड तथा धीरेन्द्र गुंज्याल पुलिस उप महानिरीक्षक, अपराध एवं कानून व्यवस्था, उत्तराखण्ड भी उपस्थित रहे।

