नई दिल्ली: फर्जी ऑनलाइन ट्रेडिंग के नाम पर देशभर में 300 करोड़ रुपये से ज्यादा की ठगी करने वाले एक बड़े साइबर गिरोह का क्राइम ब्रांच ने पर्दाफाश किया है। कोलकाता और लखनऊ से चार जालसाजों की गिरफ्तारी के साथ सामने आया है कि गिरोह ने 105 फर्जी कंपनियों के नाम पर 260 से अधिक बैंक अकाउंट खुलवाए थे और बीते चार-पांच साल से हजारों लोगों को ठगी का शिकार बना रहा था। जांच में गिरोह के खिलाफ अलग-अलग राज्यों से 2,567 एनसीआरपी शिकायतें सामने आई हैं। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान विश्वजीत मंडल, आशीष अग्रवाल, राजीव शाह और गिरोह के हैंडलर शुभम शर्मा के रूप में हुई है। आरोपियों के पास से 39 मोबाइल फोन, 258 सिम कार्ड, बड़ी संख्या में एटीएम कार्ड और चेक बुक, चार लैपटॉप और अन्य डिजिटल उपकरण बरामद किए गए हैं। पुलिस ने इनके बैंक खातों में जमा करीब 19 लाख रुपये फ्रीज किए हैं।कस्टमर आईडी सीधे स्कैमर्स को भेजी जाती थी…डीसीपी आदित्य गौतम के मुताबिक, आरोपियों को पकडऩे के लिए इंस्पेक्टर सतेंद्र खारी के नेतृत्व में विशेष टीम बनाई गई थी। तकनीकी जांच में सामने आया कि गिरोह भारतीय हैंडलर के जरिए म्यूल बैंक अकाउंट खरीदता था। इन अकाउंट्स की पूरी जानकारी अकाउंट नंबर, आइएफएससी कोड, रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर और कस्टमर आईडी सीधे स्कैमर्स को भेजी जाती थी। लिंक मोबाइल का सिम कार्ड हमेशा एक्टिव रखा जाता था और उसमें माइटी एप या एपीके फाइल जैसे ऐप इंस्टॉल कराए जाते थे, ताकि ट्रांजैक्शन के ओटीपी अपने आप स्कैमर्स तक पहुंच जाएं। टीम ने आइ4सी प्लेटफार्म के डेटा का विश्लेषण करते हुए 200 से अधिक बैंक शाखाओं से मनी ट्रेल और केवाईसी दस्तावेज जुटाए।जांच में सामने आया कि फर्जी प्रोफाइल के सहारे बड़े पैमाने पर चालू खाते खोले गए थे। इसी कड़ी में पुलिस को कोलकाता में फर्जी कंपनियों का नेटवर्क मिलने के बाद टेक्निकल सर्विलांस के जरिए पहले विश्वजीत मंडल को गिरफ्तार किया गया। उसकी निशानदेही पर आशीष अग्रवाल को दबोचा गया, जो अकाउंट बेचने का काम करता था। इसके बाद राजीव शाह और गिरोह के हैंडलर शुभम शर्मा को गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में राजीव शाह ने खुलासा किया कि पूरे साइबर फ्रॉड नेटवर्क को कंबोडिया-बेस्ड ऑपरेटर्स से जोड़ा गया था। ये ऑपरेटर्स क्रिप्टो ट्रांजैक्शन संभालते थे और पूर्वी यूपी, कोलकाता और बिहार में अपने नेटवर्क के जरिए रकम को आगे बढ़ाते थे। पुलिस ने उनके बताए ठिकानों पर छापेमारी तेज कर दी है।इंटरनेट मीडिया के जरिए फंसाते थे निवेशकजांच में सामने आया है कि आरोपी वाट्सएप, टेलीग्राम, इंस्टाग्राम और फेसबुक पर आकर्षक विज्ञापन डालकर लोगों से संपर्क करते थे। इसके बाद आनलाइन ट्रेडिंग में मोटे मुनाफे का लालच दिया जाता था। जैसे ही कोई निवेशक फंसता, उसे वेंटुरा सिक्योरिटीज, गो मार्केट ग्लोबल और आइपीओ स्टाक ट्रेडिंग जैसे नामों वाले टेलीग्राम ग्रुप्स में जोड़ दिया जाता था। पीडि़तों को ऐसे फर्जी ऐप डाउनलोड कराए जाते थे, जिनमें नकली मुनाफा दिखाने वाले हेरफेरयुक्त ट्रेडिंग डैशबोर्ड होते थे। रकम ऐंठ लेने के बाद आरोपी पीडि़तों को ब्लॉक कर देते थे।

