बड़ी खबर : आमने-सामने होंगे CM नीतीश और गृह मंत्री अमित शाह, सियासत गरमाई
पटना: आगामी 10 दिसंबर को पूर्वी क्षेत्रीय परिषद की बैठक पटना में होगी. इस बैठक में सभी चार राज्यों के मुख्यमंत्री भी शामिल होंगे। इससे पहले 2022 में 25 वीं बैठक कोलकाता में हुई थी और उस बैठक में नीतीश कुमार भाग नहीं दिए थे। उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव को बैठक में भाग लेने के लिए भेजा गया था। वहीं 26वीं बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह हिस्सा लेने वाले हैं। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी बैठक में मौजूद होंगे।
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह एक बार फिर आमने-सामने हो सकते हैं और दोनों में मुलाकात के दौरान बात भी हो सकती है। दरअसल, पूर्वी क्षेत्रीय परिषद (EZC 2023) की बैठक इस बार पटना में होनी है। इस बैठक के अध्यक्ष केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह हैं जो बैठक में शामिल होंगे। पूर्वी केंद्रीय परिषद में चार राज्य हैं। इसमें बिहार, झारखंड ,पश्चिम बंगाल और ओडिशा शामिल है।
आगामी 10 दिसंबर को पूर्वी क्षेत्रीय परिषद (EZC) की बैठक पटना में होगी। इस बैठक में सभी चार राज्यों के मुख्यमंत्री भी शामिल होते हैं, अगर मुख्यमंत्री शामिल नहीं हुए तो सरकार की प्रतिनिधि शामिल होते हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि इस बार बैठक पटना में होगी तो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी शामिल हो सकते हैं।
पूर्वी क्षेत्रीय परिषद एक ऐसा प्लेटफॉर्म है जिसके जरिए राज्य आर्थिक और सामाजिक योजना के क्षेत्र में आपसी हित से जुड़े किसी भी मुद्दे पर विचार विमर्श कर उसका समाधान करते हैं। इसके अलावा भाषण अल्पसंख्यक इंटर स्टेट परिवहन जैसे कई मुद्दों पर चर्चा की जाती है। वामपंथी उग्रवाद से निपटने के लिए भी आपसी सहयोग और समन्वय बैठक के जरिए स्थापित की जाती है।
पटना में होने वाली बैठक पर सबकी निगाहें टिकी हैं। 9 अगस्त 2022 को नीतीश कुमार एनडीए से अलग हुए थे। इसके बाद से नीतीश कुमार और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का आमना-सामना नहीं हुआ है। राजधानी पटना में पूर्वी क्षेत्र परिषद के स्थाई समिति की बैठक 17 जून 2023 को संपन्न हुई थी, जिसकी अध्यक्षता बिहार के मुख्य सचिव आमिर सुबहानी ने की थी।
इस बैठक का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय एकीकरण को साकार करना, तीव्र राज्य के संचेतना, क्षेत्रवाद तथा केंद्र एवं राज्यों को विचारों एवं अनुभवों का आदान-प्रदान करने तथा सहयोग करने के लिए सक्षम बनाना होता है। साथ ही विकास परियोजनाओं के सफल एवं तीव्र निष्पादन के लिए राज्यों के बीच सहयोग के वातावरण स्थापना करना होता है।