देहरादून : ह्यूमन्स फ़ॉर ह्यूमैनिटी द्वारा देहरादून स्थित नवदान्या बायोडायवर्सिटी कंजर्वेशन फार्म में ‘अर्थ डेमोक्रेसी’ शीर्षक से तीन दिवसीय आवासीय कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह रेज़िडेंसी एक ऐसा चिंतनशील और अनुभवात्मक मंच रहा, जहाँ पारिस्थितिकी, संस्कृति, विज्ञान, खान पान और कला का समागम देखने को मिला।
डॉ. वंदना शिवा की अर्थ डेमोक्रेसी की विचारधारा पर आधारित इस रेज़िडेंसी में मुंबई, पुणे, बेंगलुरु, दिल्ली, आसाम सहित देश के विभिन्न हिस्सों से प्रतिभागियों ने भाग लिया। इनमें फ़िल्म, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, कॉरपोरेट नेतृत्व, महिला नेतृत्व और सामाजिक प्रभाव से जुड़े पेशेवर शामिल थे, जो सभी सतत जीवनशैली को समझने और अपनाने के लिए एकजुट थे।
कार्यक्रम की शुरुआत प्रसिद्ध कठपुतली कलाकार राम लाल भट्ट के प्रभावशाली कथावाचन से हुई। मौखिक परंपराओं और सामाजिक चेतना से प्रेरित उनकी प्रस्तुतियों ने अनियंत्रित आधुनिकीकरण और पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों के क्षरण पर गहरी टिप्पणी की।
इसके बाद मुख्य वक्तव्य “अर्थ डेमोक्रेसी, फूड फ़्रीडम एंड द फ्यूचर ऑफ़ लाइफ” में विश्वविख्यात पर्यावरण चिंतक, इको-फ़ेमिनिस्ट और नवदान्या की संस्थापक डॉ. वंदना शिवा ने बीज संप्रभुता, जैव विविधता, किसानों के अधिकार और खाद्य प्रणालियों के नैतिक आधार पर अपने चार दशकों के अनुभव साझा किए। प्रतिभागियों ने इस सत्र को अत्यंत प्रेरणादायी और परिवर्तनकारी बताया।
पहले दिन का समापन प्रशिक्षित हीलर एवं फिक्की फ्लो उत्तराखंड की पूर्व चेयरपर्सन कोमल बत्रा द्वारा संचालित साउंड हीलिंग सत्र के साथ हुआ, जहाँ प्रतिभागियों को मौन, सजगता और आंतरिक संतुलन का अनुभव कराया गया।
दूसरे दिन की शुरुआत नवदान्या फार्म के जीवित बीज बैंक के भ्रमण से हुई, जिसे भवाना सेमवाल ने मार्गदर्शित किया। उन्होंने 70 से अधिक देशी धान की किस्मों, अनाज, दालों और औषधीय बीजों से परिचय कराया और बताया कि जैव विविधता किस प्रकार मिट्टी के स्वास्थ्य, नमी संरक्षण और पारिस्थितिक लचीलेपन के लिए अनिवार्य है।
इसके बाद सांस्कृतिक मानवविज्ञानी लोकेश ओहरी ने “लिविंग विद प्लेस” विषय पर सत्र लिया, जिसमें स्लो टूरिज़्म, समुदाय-आधारित जीवन और प्रकृति व संस्कृति से कटे विकास के खतरों पर चर्चा की गई।
सांस्कृतिक संध्या “नैवेद्यम – फूड फ़ॉर द डिवाइन” के अंतर्गत संस्कृति मंत्रालय की पूर्व सदस्य सचिव डॉ. उषा आर. के. ने भोजन और अर्पण की आध्यात्मिक महत्वता पर प्रकाश डाला। इसके पश्चात पुणे की प्रसिद्ध भरतनाट्यम नृत्यांगना अरुंधति पटवर्धन की प्रस्तुति ने कला, परंपरा और विद्वत्ता का सुंदर संगम प्रस्तुत किया।
अंतिम दिन का केंद्र बिंदु दैनिक जीवन में सततता रहा। वस्त्र और परिधान पर आयोजित पैनल चर्चा में रचना दुष्यंत सिंह, नजीबाबाद की पारंपरिक कारीगर लुबना ख़नम और वैज्ञानिक डॉ. प्रीति कृष्णा शामिल रहीं। चर्चा में फ़ास्ट फ़ैशन के पर्यावरणीय प्रभाव, हथकरघा परंपराओं और जलवायु-संवेदनशील जीवनशैली पर गहन विचार-विमर्श हुआ।
पूरे कार्यक्रम के दौरान पूर्व राजनयिक शिखा घिल्डियाल द्वारा टैरो और हीलिंग सत्र भी आयोजित किए गए, जिनका उद्देश्य आत्ममंथन और मानसिक संतुलन को प्रोत्साहित करना था।
इस रेज़िडेंसी का क्यूरेशन ह्यूमन्स फ़ॉर ह्यूमैनिटी के संस्थापक अनुराग चौहान ने किया। उनका नवदान्या और डॉ. वंदना शिवा के साथ पुराना जुड़ाव रहा है। वर्ष 2011 में एक छात्र के रूप में डॉ. शिवा का व्याख्यान सुनने के बाद से वे सततता और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में सक्रिय हैं और वॉश प्रोजेक्ट जैसी पहलों के माध्यम से अब तक 50 लाख से अधिक महिलाओं के जीवन को प्रभावित कर चुके हैं।
रेज़िडेंसी पर अपने विचार साझा करते हुए अनुराग चौहान ने कहा, “अर्थ डेमोक्रेसी को सुनने की प्रक्रिया के रूप में कल्पित किया गया था—मिट्टी को सुनना, संस्कृति को सुनना, खान पान को सुनना और एक-दूसरे को सुनना। जब हम सच में सुनते हैं, तो देखभाल स्वाभाविक हो जाती है। यह रेज़िडेंसी उत्तर खोजने से पहले जागरूकता को याद करने का प्रयास थी।”
कार्यक्रम का समापन सामूहिक वृक्षारोपण के साथ हुआ, जो पृथ्वी और आने वाली पीढ़ियों के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक बना।

